‘माघ लहइली सुरिक शिकार खइली रे हाँ सखी अइ हो माघ के पिली गुरी गुरी जाँर सकिरी गलियावामा लगल बजरिया रे हाँ सखी अइ हो लानी दे हो भाटु नथिया बजार सालिक नथिया भै ल रे महान्…’ यो थारु गीत